रफ़ीउद्दीन हाश्मी का परिचय
पहचान: इक़बालियत के विशेषज्ञ, शोधकर्ता, आलोचक, यात्रा-वृत्त लेखक और इक़बाली साहित्य के प्रतिष्ठित व्याख्याकार
रफ़ीउद्दीन हाशमी का जन्म 9 फ़रवरी 1940 को मिसरियाल, ज़िला तलागंग, पंजाब में हुआ। उन्होंने बी.ए. निजी छात्र के रूप में गवर्नमेंट कॉलेज सरगोधा से किया। 1966 में ओरिएंटल कॉलेज, लाहौर से एम.ए. उर्दू और 1981 में पंजाब विश्वविद्यालय से “तसानीफ़-ए-इक़बाल का तहक़ीक़ी व तौज़ीही मुताला” विषय पर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
1969 में वे पंजाब शिक्षा विभाग से जुड़े और विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अध्यापन सेवाएँ देने के बाद 1982 में ओरिएंटल कॉलेज, लाहौर में नियुक्त हुए। बाद में वे उर्दू विभाग के अध्यक्ष और प्रोफ़ेसर रहे। वे पंजाब विश्वविद्यालय के इक़बालियत विभाग से भी संबद्ध रहे और सेवानिवृत्ति के बाद हायर एजुकेशन कमीशन में प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए।
रफ़ीउद्दीन हाशमी का नाम उपमहाद्वीप के प्रमुख इक़बाल-विदों में लिया जाता है। इक़बालियत, शोध, आलोचना और उर्दू साहित्य के विभिन्न विषयों पर उनकी दर्जनों पुस्तकें प्रकाशित हुईं। उनकी प्रमुख कृतियों में “ख़ुतूत-ए-इक़बाल”, “किताबियात-ए-इक़बाल”, “इक़बाल: मसाइल व मबाहिस”, “इक़बालियत के सौ साल”, “तहक़ीक़-ए-इक़बालियत के मआख़िज़”, “इक़बालियत: तफ़हीम व तजज़िया”, “अल्लामा इक़बाल: शख्सियत व फ़न” और “जामिआत में उर्दू तहक़ीक़” शामिल हैं।
वे एक उत्कृष्ट यात्रा-वृत्त लेखक भी थे। उनके यात्रा-वृत्त “पोशीदा तेरी ख़ाक में” (अंदलुस) और “सूरज को ज़रा देख” (जापान) को विशेष लोकप्रियता प्राप्त हुई। 2002 में उन्होंने शोध-पत्रिका “बाज़याफ़्त” का प्रकाशन आरंभ किया, जिसे साहित्यिक और शोध-जगत में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
निधन: डॉ. रफ़ीउद्दीन हाशमी का निधन 25 जनवरी 2024 को लाहौर में हुआ।
सहायक लिंक : | https://en.wikipedia.org/wiki/Rafiuddin_Hashmi