aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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रंगीन सआदत यार ख़ाँ

1756 - 1835 | लखनऊ, भारत

उर्दू शायरी की विधा ' रेख़्ती ' के लिए प्रसिद्ध जिसमें शायर औरतों की भाषा में बोलता है

उर्दू शायरी की विधा ' रेख़्ती ' के लिए प्रसिद्ध जिसमें शायर औरतों की भाषा में बोलता है

रंगीन सआदत यार ख़ाँ की रेख़्ती

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