ग़ज़ल 9

शेर 3

कितना नादिम हूँ किसी शख़्स से शिकवा कर के

मुझ से देखा गया उस का पशेमाँ होना

  • शेयर कीजिए

अटा है शहर बारूदी धुएँ से

सड़क पर चंद बच्चे रो रहे हैं

वो अहल-ए-कहफ़ थे जिन को ज़िया मिली आख़िर

मिरा ये दौर कि अब तक अंधेरा ग़ार में है

  • शेयर कीजिए
 

"गुजरांवाला" के और शायर

  • अहमद ज़फ़र अहमद ज़फ़र
  • मोहम्मद शाहिद फ़ीरोज़ मोहम्मद शाहिद फ़ीरोज़
  • यूनुस तहसीन यूनुस तहसीन
  • हमज़ा दाइम हमज़ा दाइम
  • अक़ील अब्बास चुग़ताई अक़ील अब्बास चुग़ताई
  • अब्दुल मलिक सोज़ अब्दुल मलिक सोज़
  • मुकर्रम हुसैन आवान ज़मज़म मुकर्रम हुसैन आवान ज़मज़म
  • हफ़ीज़ ताईब हफ़ीज़ ताईब
  • इनाम कबीर इनाम कबीर
  • आतिफ़ कमाल राना आतिफ़ कमाल राना