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रउफ़ रज़ा

1956 - 2016 | दिल्ली, भारत

प्रमुख उत्तर-आधुनिक शायर

प्रमुख उत्तर-आधुनिक शायर

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Isi bikhre huye lehje pe guzare jao

Rauf Raza: A prominent post-modern Urdu poet who was born in 1956 at Amroha U.P but later shifted to Delhi. Dastaken Meri" is his poetic collection that won him Delhi Urdu Academy Award. Rauf Raza reciting his ghazal at Rekhta Studio. रउफ़ रज़ा

रउफ़ रज़ा

Rauf Raza, poet from Delhi is reciting his ghazals at Rekhta Studio. रउफ़ रज़ा

रउफ़ रज़ा

रउफ़ रज़ा

इसी बिखरे हुए लहजे पे गुज़ारे जाओ

रउफ़ रज़ा

उस का ख़याल आते ही मंज़र बदल गया

रउफ़ रज़ा

कोई ज़ख़्म खुला तो सहने लगे कोई टीस उठी लहराने लगे

रउफ़ रज़ा

जितना पाता हूँ गँवा देता हूँ

रउफ़ रज़ा

जो भी कुछ अच्छा बुरा होना है जल्दी हो जाए

रउफ़ रज़ा

तुम भी इस सूखते तालाब का चेहरा देखो

रउफ़ रज़ा

नाश्ते पर जिसे आज़ाद किया है मैं ने

रउफ़ रज़ा

बहुत ख़ूबियाँ हैं हवस-कार दिल में

रउफ़ रज़ा

ये मिरी रूह सियह रात में निकली है कहाँ

रउफ़ रज़ा

रौशनी होने लगी है मुझ में

रउफ़ रज़ा

वो तो नहीं मिला है साँसों जिए तो क्या है

रउफ़ रज़ा

सब होत न होत से नथरी हुई आसान ग़ज़ल हूँ छा के सुनो

रउफ़ रज़ा

हर मौसम में ख़ाली-पन की मजबूरी हो जाओगे

रउफ़ रज़ा

शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

  • Isi bikhre huye lehje pe guzare jao

    Isi bikhre huye lehje pe guzare jao रउफ़ रज़ा

  • रउफ़ रज़ा

    रउफ़ रज़ा रउफ़ रज़ा

  • रउफ़ रज़ा

  • रउफ़ रज़ा

  • इसी बिखरे हुए लहजे पे गुज़ारे जाओ

    इसी बिखरे हुए लहजे पे गुज़ारे जाओ रउफ़ रज़ा

  • उस का ख़याल आते ही मंज़र बदल गया

    उस का ख़याल आते ही मंज़र बदल गया रउफ़ रज़ा

  • कोई ज़ख़्म खुला तो सहने लगे कोई टीस उठी लहराने लगे

    कोई ज़ख़्म खुला तो सहने लगे कोई टीस उठी लहराने लगे रउफ़ रज़ा

  • जितना पाता हूँ गँवा देता हूँ

    जितना पाता हूँ गँवा देता हूँ रउफ़ रज़ा

  • जो भी कुछ अच्छा बुरा होना है जल्दी हो जाए

    जो भी कुछ अच्छा बुरा होना है जल्दी हो जाए रउफ़ रज़ा

  • तुम भी इस सूखते तालाब का चेहरा देखो

    तुम भी इस सूखते तालाब का चेहरा देखो रउफ़ रज़ा

  • नाश्ते पर जिसे आज़ाद किया है मैं ने

    नाश्ते पर जिसे आज़ाद किया है मैं ने रउफ़ रज़ा

  • बहुत ख़ूबियाँ हैं हवस-कार दिल में

    बहुत ख़ूबियाँ हैं हवस-कार दिल में रउफ़ रज़ा

  • ये मिरी रूह सियह रात में निकली है कहाँ

    ये मिरी रूह सियह रात में निकली है कहाँ रउफ़ रज़ा

  • रौशनी होने लगी है मुझ में

    रौशनी होने लगी है मुझ में रउफ़ रज़ा

  • वो तो नहीं मिला है साँसों जिए तो क्या है

    वो तो नहीं मिला है साँसों जिए तो क्या है रउफ़ रज़ा

  • सब होत न होत से नथरी हुई आसान ग़ज़ल हूँ छा के सुनो

    सब होत न होत से नथरी हुई आसान ग़ज़ल हूँ छा के सुनो रउफ़ रज़ा

  • हर मौसम में ख़ाली-पन की मजबूरी हो जाओगे

    हर मौसम में ख़ाली-पन की मजबूरी हो जाओगे रउफ़ रज़ा