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रउफ़ रज़ा

1956 - 2016 | दिल्ली, भारत

प्रमुख उत्तर-आधुनिक शायर

प्रमुख उत्तर-आधुनिक शायर

यूँही हँसते हुए छोड़ेंगे ग़ज़ल की महफ़िल

एक आँसू से ज़ियादा कोई रोने का नहीं

वो ये कहते हैं सदा हो तो तुम्हारे जैसी

इस का मतलब तो यही है कि पुकारे जाओ