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रज़ा मौरान्वी

उन्नाव, भारत

रज़ा मौरान्वी

ग़ज़ल 8

शेर 2

ज़िंदगी अब इस क़दर सफ़्फ़ाक हो जाएगी क्या

भूक ही मज़दूर की ख़ूराक हो जाएगी क्या

बुलाते हैं हमें मेहनत-कशों के हाथ के छाले

चलो मुहताज के मुँह में निवाला रख दिया जाए

 

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