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फ़िगार उन्नावी

उन्नाव, भारत

ग़ज़ल 16

शेर 33

ग़म-ओ-अलम से जो ताबीर की ख़ुशी मैं ने

बहुत क़रीब से देखी है ज़िंदगी मैं ने

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उन पे क़ुर्बान हर ख़ुशी कर दी

ज़िंदगी नज़्र-ए-ज़िंदगी कर दी

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ब-क़द्र-ए-ज़ौक़ मेरे अश्क-ए-ग़म की तर्जुमानी है

कोई कहता है मोती है कोई कहता है पानी है

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ई-पुस्तक 1

Harf-o-Nawa

 

2001

 

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