Sabir Adeeb's Photo'

साबिर अदीब

1939 | भोपाल, भारत

साबिर अदीब के शेर

मैं अकेला हूँ तू भी तन्हा है

हम भी कितने हैं बे-सहारे देख

तिलिस्म टूट गया शब का मैं भी घर को चलूँ

रुका था जिस के लिए वो भी घर गया कब का

इस क़दर ऊँची हुई दीवार-ए-नफ़रत हर तरफ़

आज हर इंसाँ से इंसाँ की पज़ीराई गई