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साबिर ज़फ़र के ऑडियो

ग़ज़ल

कोई तो तर्क-ए-मरासिम पे वास्ता रह जाए

नोमान शौक़

ख़ुमार-ए-शब में जो इक दूसरे पे गिरते हैं

नोमान शौक़

दरीचा बे-सदा कोई नहीं है

नोमान शौक़

दिन को मिस्मार हुए रात को तामीर हुए

नोमान शौक़

निगाह करने में लगता है क्या ज़माना कोई

नोमान शौक़

पड़ा न फ़र्क़ कोई पैरहन बदल के भी

नोमान शौक़

मैं एक हाथ तिरी मौत से मिला आया

नोमान शौक़

हर एक मरहला-ए-दर्द से गुज़र भी गया

नोमान शौक़

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Jashn-e-Rekhta | 8-9-10 December 2023 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate - New Delhi

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