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Saddam Husain Muzmar's Photo'

सद्दाम हुसैन मुज़मर

1993 | अलीगढ़, भारत

नई नस्ल के शाइरों में शुमार, फ़िक्र-ओ-एहसास से भरे शेर कहते हैं, पहला शेरी मजमूआ प्रकाशित

नई नस्ल के शाइरों में शुमार, फ़िक्र-ओ-एहसास से भरे शेर कहते हैं, पहला शेरी मजमूआ प्रकाशित

सद्दाम हुसैन मुज़मर का परिचय

मूल नाम : सद्दाम हुसैन

जन्म :रुड़की, उत्तराखण्ड

सद्दाम हुसैन, तख़ल्लुस मुज़मर, का तअल्लुक़ मौज़ा सरचन्दी, तहसील रूड़की, ज़िला हरिद्वार से है। वह 1993 में पैदा हुए। इब्तिदाई तालीम मदरसा मिसबाह-उल-उलूम, सरचन्दी से हासिल की। बाद अज़ाँ जामिया इस्लामिया, रेड़ी ताजपुरा, ज़िला सहारनपुर से दर्जा हफ़्तुम तक दीनी और दुनियावी तालीम मुकम्मल की। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की तालीम 2012-2014 नेशनल इंस्टीट्यूट आफ़ ओपन स्कूलिंग से हासिल की।

आला तालीम के सिलसिले में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का रुख़ किया, जहाँ से उन्होंने 2016 में बी.ए. ऑनर्ज़ (उर्दू), 2019 में उर्दू अदब में मास्टर्ज़ डिग्री हासिल की, और इस वक़्त यूनिवर्सिटी ही में, उर्दू से पी.एच.डी. कर रहे हैं।

शाइरी से शग़फ़ एम.ए. के पहले साल से पैदा हुआ और बाक़ाइदा तौर पर 2020 से शेरगोई का आग़ाज़ किया। उनका पहला शेरी मजमूआ “क़ियामत के बावजूद” अगस्त 2024 में प्रकाशित हुआ। मुज़मर बुनियादी तौर पर ग़ज़ल के शाइर हैं और उनकी शाइरी फ़िक्री गहराई और एहसासात की आईनादार है।

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