शेर 1

बाँध के सफ़ हों सब खड़े तेग़ के साथ सर झुके

आज तो क़त्ल-गाह में धूम से हो नमाज़-ए-इश्क़

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पुस्तकें 1

Bayaz-e-Sehar

 

1937

 

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