सालिम अज़ीम के शेर
तराशते हैं जो पत्थर को सख़्त गर्मी में
फिर उन का रिज़्क़ बताओ हलाल है कि नहीं
तुम्हीं चाँदनी हो तुम्हीं माह-पारा
तुम्हीं से तो रौशन ये सारा जहाँ है
-
टैग : हुस्न
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
फूल से रफ़ाक़त की एक आस पाली थी
तार तार दामन है ज़िंदगी के ख़ारों से
-
टैग : फूल
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
ज़िंदगी के ऐसे नाज़ुक मोड़ पर मैं आ गया
पाँव में ठोकर लगे या न लगे गिर जाऊँगा
-
टैग : ज़िंदगी
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
जिस पे इतरा के रोज़ चलते हो
उस के नीचे तो पानी पानी है
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
वह्म है ये कि मिरी हद में अमाँ रहते हैं
मुझ में सौ फ़ित्ने ब-अंदाज़-ए-बयाँ रहते हैं
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड