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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

सरमद ख़ान के शेर

मुझे सुकूँ नहीं देती हैं अब तिरी यादें

अब इन दियों से बहुत तीरगी निकलती है

दरख़्त शब चराग़ और तीरगी

तुम्हारे बाद सब से दोस्ती हुई

दरख़्त टूटते पत्तों का दुख समझते हैं

उन्हें भी शामिल-ए-यारान-ए-ग़म किया जाए

तिरे बदन को छू रही थीं उँगलियाँ

हथेलियों में तेज़ रौशनी हुई

मैं पूरे दिन की थकन घर में ले के आया हूँ

उदासियो मुझे फिर ताज़ा-दम किया जाए

वो जब भी रात को छत पर टहलने जाता है

बहुत झिझकते हुए चाँदनी निकलती है

'इश्क़ वाले भी 'अजब हैं कि जहाँ भी जाएँ

सब से पहले वहाँ ख़ुशबू की दुकाँ ढूँढते हैं

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