शब्बीर अहमद का परिचय
पहचान: उर्दू कथा-लेखक, अनुवादक और साहित्यिक व्यक्तित्व
शबीर अहमद समकालीन उर्दू साहित्य के प्रमुख उपन्यासकार, कहानीकार, अनुवादक और निबंधकार हैं, जिन्होंने आधुनिक उर्दू फ़िक्शन और अंतरभाषीय साहित्यिक संबंधों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी रचनाओं में इतिहास, पहचान, स्मृति और मानवीय भावनाओं की गहरी झलक मिलती है।
शबीर अहमद का जन्म 1 जून 1963 को कोलकाता में हुआ। वे उर्दू, अंग्रेज़ी, बांग्ला और हिंदी भाषाओं पर अधिकार रखते हैं। उन्होंने 1983 में सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से बी.कॉम (ऑनर्स) और 1985 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.कॉम किया।
पेशेवर जीवन में वे पश्चिम बंगाल सरकार के श्रम विभाग में वरिष्ठ प्रशासक रहे और विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य किया। बाद में अतिरिक्त निदेशक (Additional Director) के पद से सेवानिवृत्त हुए।
साहित्यिक क्षेत्र में उनका नाम प्रमुख उर्दू फ़िक्शन लेखकों में लिया जाता है। उनके उपन्यासों में हज़ूर आमा (2020), बेदरोही (2022) और जुग-बानी (2025) शामिल हैं। कहानी संग्रहों में चौथा फ़नकार (2012) महत्वपूर्ण है और महायुद्ध प्रकाशनाधीन है। यात्रा-वृत्तांत ग़ालिब के शहर में (2005) तथा बच्चों के लिए बच्चों के रवीन्द्रनाथ (2015) भी काफ़ी लोकप्रिय रहे।
अनुवादक के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किए। प्रमुख अनुवादों में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 32 कहानियों का उर्दू अनुवाद टैगोर बत्तीसी, सुनील गंगोपाध्याय के उपन्यास का अनुवाद 'और उस वक़्त', सुभाष मुखोपाध्याय की कविताओं का अनुवाद चलते चलते, तथा आधुनिक बांग्ला कवि निरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती के काव्य-संग्रह अलंगु राजा का उर्दू अनुवाद शाह बे-लिबास शामिल हैं। इन अनुवादों को साहित्यिक हलकों में सराहना मिली।
उनकी रचनाएँ देश की प्रतिष्ठित उर्दू पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं और उनकी पुस्तकें साहित्य अकादमी, एनसीपीयूएल और पश्चिम बंगाल उर्दू अकादमी जैसे संस्थानों से प्रकाशित हुई हैं।
सम्मानों में 2021 में उपन्यास हज़ूर आमा पर उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी का प्रथम पुरस्कार शामिल है। वे दो बार साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए नामांकित हो चुके हैं (2023, 2024)। इसके अलावा विभिन्न राज्य उर्दू अकादमियों से भी सम्मानित हुए हैं।
उनके फ़िक्शन के विषयों में भारतीय उपमहाद्वीप के सामाजिक-ऐतिहासिक बदलाव, पहचान और प्रतिरोध, तथा राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में मानवीय मूल्यों की खोज शामिल है। वे मुख्यतः उर्दू में लिखते हैं और अंग्रेज़ी, बांग्ला तथा हिंदी से अनुवाद करते हैं।
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