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शाह नसीर

1756 - 1838 | दिल्ली, भारत

18वीं सदी के अग्रणी शायरों में विख्यात।

18वीं सदी के अग्रणी शायरों में विख्यात।

शाह नसीर के ऑडियो

ग़ज़ल

उस काकुल-ए-पुर-ख़म का ख़लल जाए तो अच्छा

फ़सीह अकमल

क़दम न रख मिरी चश्म-ए-पुर-आब के घर में

फ़सीह अकमल

ख़ाल-ए-मश्शाता बना काजल का चश्म-ए-यार पर

फ़सीह अकमल

गो सियह-बख़्त हूँ पर यार लुभा लेता है

फ़सीह अकमल

मेरी तुर्बत पर चढ़ाने ढूँडता है किस के फूल

फ़सीह अकमल

शमीम-ए-ज़ुल्फ़-ए-मुअम्बर जो रू-ए-यार से लूँ

फ़सीह अकमल

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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