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शहज़ाद अहमद

1932 - 2012 | लाहौर, पाकिस्तान

नई ग़ज़ल के प्रमुखतम पाकिस्तानी शायरों में विख्यात

नई ग़ज़ल के प्रमुखतम पाकिस्तानी शायरों में विख्यात

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Gaye khurshid ko kisne pukaara

शहज़ाद अहमद

चुप के आलम में वो तस्वीर सी सूरत उस की

शहज़ाद अहमद

डूब जाएँगे सितारे और बिखर जाएगी रात

शहज़ाद अहमद

प्यार के रंग-महल बरसों में तय्यार हुए

शहज़ाद अहमद

ये सोच कर कि तेरी जबीं पर न बल पड़े

शहज़ाद अहमद

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अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है

अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है Sonu Kakkar

अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है

अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है रंजीत रजवाड़ा

जल भी चुके परवाने हो भी चुकी रुस्वाई

जल भी चुके परवाने हो भी चुकी रुस्वाई मेहदी हसन

दरख़्तों पर कोई पत्ता नहीं था

दरख़्तों पर कोई पत्ता नहीं था ज़िया मोहीउद्दीन

बे-शुमार आँखें

बे-शुमार आँखें ज़िया मोहीउद्दीन

शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

  • Gaye khurshid ko kisne pukaara

    Gaye khurshid ko kisne pukaara शहज़ाद अहमद

  • चुप के आलम में वो तस्वीर सी सूरत उस की

    चुप के आलम में वो तस्वीर सी सूरत उस की शहज़ाद अहमद

  • डूब जाएँगे सितारे और बिखर जाएगी रात

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    प्यार के रंग-महल बरसों में तय्यार हुए शहज़ाद अहमद

  • ये सोच कर कि तेरी जबीं पर न बल पड़े

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  • बे-शुमार आँखें

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