Shamim Karhani's Photo'

शमीम करहानी

1913 - 1975 | करहान, भारत

प्रसिद्ध राष्ट्रवादी एवं तरक़्क़ी-पसंद शाइर

प्रसिद्ध राष्ट्रवादी एवं तरक़्क़ी-पसंद शाइर

ग़ज़ल 43

नज़्म 5

 

शेर 6

लीजिए बुला लिया आप को ख़याल में

अब तो देखिए हमें कोई देखता नहीं

now that I have invited you in my reverie

you can look upon me, none is there to see

now that I have invited you in my reverie

you can look upon me, none is there to see

  • शेयर कीजिए

याद-ए-माज़ी ग़म-ए-इमरोज़ उमीद-ए-फ़र्दा

कितने साए मिरे हमराह चला करते हैं

पीने को इस जहान में कौन सी मय नहीं मगर

इश्क़ जो बाँटता है वो आब-ए-हयात और है

पुस्तकें 10

Aks-e-Gul

 

1984

Aks-e-Gul

 

1964

Jaan-e-Biraadar

Ehtesham Hussain Par Marka Aaraa Nazam

1973

Ranga Ke Aur Geet

 

1965

Raushan Andhera

 

1946

Shameem Karhani

 

1962

Shameem Karhani : Hayat, Shakhsiyat Aur Shairi

 

1986

Subh-e-Faran

 

1974

Zulfiqar

 

1964

 

चित्र शायरी 1

रखना है तो फूलों को तू रख ले निगाहों में ख़ुशबू तो मुसाफ़िर है खो जाएगी राहों में क्यूँ मेरी मोहब्बत से बरहम हो ज़मीं वालो इक और गुनह रख लो दुनिया के गुनाहों में कैफ़ियत-ए-मय दिल का दरमाँ न हुई लेकिन रंगीं तो रही दुनिया कुछ देर निगाहों में काँटों से गुज़र जाना दुश्वार नहीं लेकिन काँटे ही नहीं यारो कलियाँ भी हैं राहों में पर्दा हो तो पर्दा हो इस पर्दे को क्या कहिए छुपते हैं निगाहों से रहते हैं निगाहों में यारान-ए-रह-ए-ग़ुर्बत क्या हो गए क्या कहिए कुछ सो गए मंज़िल पर कुछ खो गए राहों में गुज़री हुई सदियों को आग़ाज़-ए-सफ़र समझो माज़ी अभी कम-सिन है फ़र्दा की निगाहों में रंगीं है 'शमीम' अब तक पैराहन-ए-जाँ अपना हम रात गुज़ार आए किस ख़्वाब की बाँहों में

 

वीडियो 3

This video is playing from YouTube

ऑडियो 11

कौन है दर्द-आश्ना संग-दिली का दौर है

ग़म दो आलम का जो मिलता है तो ग़म होता है

जश्न-ए-हयात हो चुका जश्न-ए-ममात और है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

  • अली अब्बास हुसैनी अली अब्बास हुसैनी Uncle
  • सय्यद आज़म हुसैन आज़म सय्यद आज़म हुसैन आज़म भाई

"करहान" के और शायर

  • सय्यद आज़म हुसैन आज़म सय्यद आज़म हुसैन आज़म