शेर सिंह नाज़ देहलवी के शेर
चूम कर आया है ये दस्त-ए-हिनाई आप का
क्यूँ न रक्खूँ मैं कलेजे से लगा कर तीर को
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
आबला-पाई हमारी रंग लाई दश्त में
ख़ार-ए-सहरा तिश्ना-ए-ख़ूँ हो के नश्तर हो गए
रो दिए फ़रियाद पर मेरी बुतान-ए-संग-दिल
मेरे नालों से पिघल कर मोम पत्थर हो गए
-
टैग : फ़रियाद
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
बल पड़े चितवन पे अबरू तन के ख़ंजर हो गए
ज़िक्र-ए-वस्ल आते ही वो जामे से बाहर हो गए
इक बहाना चाहिए उन को बिगड़ने के लिए
मैं ने ज़ुल्फ़ों की बलाएँ लीं मिरे सर हो गए
निगह-ए-लुत्फ़ में है उक़्दा-कुशाई मुज़्मर
काम बिगड़े हुए बंदों के सँवर जाते हैं
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
बातों में ढूँडते हैं वो पहलू मलाल का
मतलब ये है कि ज़िक्र न आए विसाल का
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड