सय्यद ताजुद्दीन शाकिर का परिचय
हज़रत सय्यद शाह ताजुद्दीन ‘शाकिर’ क़ादरी सिलसिला-ए-मुनेमिया क़ादरिया के एक निहायत मोहतरम सूफ़ी बुज़ुर्ग थे, जिनकी विलादत बिहार के ज़िला शेखपुरा में हुई। आप पटना की मशहूर 'पक्की दरगाह' के हज़रत मख़दूम सय्यद आलम सूफ़ी चिश्ती के मुक़द्दस रूहानी खानदान से ताल्लुक रखते थे।
आपने पिंड शरीफ़ में खानक़ाह-ए-मुनेमिया शाकिरिया की बुनियाद रखी, जो आगे चलकर तसव्वुफ़ की तालीम और रूहानी रहनुमाई का एक अज़ीम मरकज़ बनी। आप सिमली शरीफ़ के हज़रत सय्यद शाह अली हुसैन ‘बाक़ी’ के मुरीद और ख़लीफ़ा थे।
27 दिसंबर 1921 को आपके विसाल (निधन) के बाद, आपके साहबज़ादे हज़रत सय्यद शाह क़मरुल हुदा ‘क़मर’ शाकिरी सज्जादा नशीन मुक़र्रर हुए, जिन्होंने आपके रूहानी विरसे को मजीद आगे बढ़ाया। आपकी तस्नीफ़ (किताब) 'शहूद-ए-वह्दत' आपकी अक़ीदत का आईना है, जिसमें नात और मनक़बत का ज़िक्र मिलता है।