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ज़रीफ़ जबलपूरी

1913 - 1963 | जबलपुर, भारत

ज़रीफ़ जबलपूरी के संपूर्ण

नज़्म 1

 

शेर 1

ये तरक़्क़ी का ज़माना है तिरे आशिक़ पर

उँगलियाँ उठती थीं अब हाथ उठा करते हैं

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हास्य 2

 

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