ज़ीशान अतहर

ग़ज़ल 1

 

अशआर 2

रौशनी में तिरी रफ़्तार से करता हूँ सफ़र

ज़िंदगी मुझ से कहीं तेज़ चलने लग जाए

ऐसे तय्यार हुआ बैठा हूँ

जैसे सच-मुच ही कहीं जाना है

  • शेयर कीजिए
 

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बोलिए