ज़ीशान अतहर के शेर

रौशनी में तिरी रफ़्तार से करता हूँ सफ़र

ज़िंदगी मुझ से कहीं तेज़ चलने लग जाए

ऐसे तय्यार हुआ बैठा हूँ

जैसे सच-मुच ही कहीं जाना है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बोलिए