aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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मक्तबा अल-हसनात, रामपुर यू.पी.
पर्काशक
कुतुब ख़ाना रहीमिया, देवबंद, यू.पी.
ई. पी. पोल्टन
संपादक
श्री रमा नन्द पुस्तकालय आजमगढ़ यू पी
शम्सुल उलूम एजुकेशनल सोसाइटी, फ़तेहपुर यू. पी.
दफतर इजलास सद साला दारुल उलूम देवबंद (यू. पी)
मदरसा अहले सुन्नत ज़िया- उल-उलूम,यु.पी
ओ- पी- शर्मा
लेखक
यू. जी. एस. एम. सिवहारा, यू.पी.
अशोक पब्लिकेशन्स, मेरठ, यू पी
सेक्रेट्री उर्दू अकादमी, यू.पी.
शीराज़-ए-हिन्द पब्लिशिंग हाउस, जौनपुर, यू.पी.
यू पी कंप्यूटर, भोपाल
आप हम पब्लिकेशन, मुम्बइ
हाजी अब्दुर्रहमान एजुकेशनल एण्ड मेमोरियल ट्रस्ट, सुल्तानपुर (यू.पी)
सुना है रब्त है उस को ख़राब-हालों सेसो अपने आप को बरबाद कर के देखते हैं
और क्या देखने को बाक़ी हैआप से दिल लगा के देख लिया
आप में कैसे आऊँ मैं तुझ बिनसाँस जो चल रही है आरी है
सुनो ज़िक्र है कई साल का कि किया इक आप ने वा'दा थासो निबाहने का तो ज़िक्र क्या तुम्हें याद हो कि न याद हो
उस की उमीद-ए-नाज़ का हम से ये मान था कि आपउम्र गुज़ार दीजिए उम्र गुज़ार दी गई
दो इन्सानों का बे-ग़रज़ लगाव एक अज़ीम रिश्ते की बुनियाद होता है जिसे दोस्ती कहते हैं। दोस्त का वक़्त पर काम आना, उसे अपना राज़दार बनाना और उसकी अच्छाइयों में भरोसा रखना वह ख़ूबियाँ हैं जिन्हें शायरों ने खुले मन से सराहा और अपनी शायरी का मौज़ू बनाया है। लेकिन कभी-कभी उसकी दग़ाबाज़ियाँ और दिल तोड़ने वाली हरकतें भी शायरी का विषय बनी है। दोस्ती शायरी के ये नमूने तो ऐसी ही कहानी सुनाते है।
इश्क़ बहुत सारी ख़्वाहिशों का ख़ूबसूरत गुलदस्ता है। दीदार, तमन्ना का ऐसा ही एक हसीन फूल है जिसकी ख़ुश्बू आशिक़ को बेचैन किए रखती है। महबूब को देख लेने भर का असर आशिक़ के दिल पर क्या होता है यह शायर से बेहतर भला कौन जान सकता है। आँखें खिड़की, दरवाज़े और रास्ते से हटने का नाम न लें ऐसी शदीद ख़्वाहिश होती है दीदार की। तो आइये इसी दीदार शायरी से कुछ चुनिंदा अशआर की झलक देखते हैः
मुस्कुराहट को हम इंसानी चेहरे की एक आम सी हरकत समझ कर आगे बढ़ जाते हैं लेकिन हमारे इन्तिख़ा कर्दा इन अशआर में देखिए कि चेहरे का ये ज़रा सा बनाव किस क़दर मानी-ख़ेज़ी लिए हुए है। इश्क़-ओ-आशिक़ी के बयानिए में इस की कितनी जहतें हैं और कितने रंग हैं। माशूक़ मुस्कुराता है तो आशिक़ उस से किन किन मानी तक पहुँचता है। शायरी का ये इन्तिख़ाब एक हैरत कदे से कम नहीं इस में दाख़िल होइये और लुत्फ़ लीजिए।
आपآپ
ख़ुद, आप से आप, स्वयं
आप कोآپ کو
خود کو، اپنی ذات کو
आप हीآپ ہی
آپ (رک) میں کسی بات کے حصر کے لیے مستعمل.
आप सेآپ سے
स्वयं, अपने अथान पर, अपनी जगह, अपने वंश में
Meer Ki Aap Beeti
मीर तक़ी मीर
आत्मकथा
Aap Se Kya Parda
इब्न-ए-इंशा
मज़ामीन / लेख
Aap Musafir Aap Hi Manzil
मोमिन इक़बाल उस्मान
अशआर
आप बीती
ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार खां
घुंगरू टूट गए
क़तील शिफ़ाई
Aap Ka Saadat Hasan Manto
सआदत हसन मंटो
पत्र
Talash-e-Haq
महात्मा गाँधी
Aap Beeti Rasheed Ahmad Siddiqi
सय्यद माेईनुर्रहमान
Aap Ki Tareef
मुजतबा हुसैन
गद्य/नस्र
अाप बीती इब्न-ए-ख़लदून
अब्दुर्रहमान इब्न-ए-ख़लदून
ग़ालिब की आप बीती
निसार अहमद फ़ारूक़ी
Gorki Ki Aap Beeti (Bachpan)
मैक्सिम गोर्की
Aap Beeti Paap Beeti
साक़ी फ़ारुक़ी
जीवनी
Quran Aap Se Kya Kahta Hai?
मोहम्मद मंज़ूर नोमानी
Mere Log Zinda Rahenge
लैला ख़ालिद
ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैंज़बाँ मिली है मगर हम-ज़बाँ नहीं मिलता
ये जन्नत मुबारक रहे ज़ाहिदों कोकि मैं आप का सामना चाहता हूँ
आप के बा'द हर घड़ी हम नेआप के साथ ही गुज़ारी है
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैंतुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो
उठाई क्यूँ न क़यामत अदू के कूचे मेंलिहाज़ आप को वक़्त-ए-ख़िराम किस का था
रह-ए-वफ़ा में हरीफ़-ए-ख़िराम कोई तो होसो अपने आप से आगे निकल के देखते हैं
''आप की याद आती रही रात भर''चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर
वही नाज़-ओ-अदा वही ग़म्ज़ेसर-ब-सर आप पर गया हूँ मैं
तेग़-बाज़ी का शौक़ अपनी जगहआप तो क़त्ल-ए-आम कर रहे हैं
जब वो जमाल-ए-दिल-फ़रोज़ सूरत-ए-मेहर-ए-नीमरोज़आप ही हो नज़ारा-सोज़ पर्दे में मुँह छुपाए क्यूँ
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