आपकी खोज से संबंधित
परिणाम ",P4R"
अत्यधिक संबंधित परिणाम ",p4r"
पृष्ठ के संबंधित परिणाम ",p4r"
समस्त
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम ",p4r"
ग़ज़ल
डरे क्यूँ मेरा क़ातिल क्या रहेगा उस की गर्दन पर
वो ख़ूँ जो चश्म-ए-तर से उम्र भर यूँ दम-ब-दम निकले
मिर्ज़ा ग़ालिब
शेर
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
मोमिन ख़ाँ मोमिन
ग़ज़ल
चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है
हसरत मोहानी
नज़्म
रक़ीब से!
आश्ना हैं तिरे क़दमों से वो राहें जिन पर
उस की मदहोश जवानी ने इनायत की है




