aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "تخلف"
बेतकल्लुफ़ शाजापुरी
born.1940
शायर
तखल्लुस भोपाली
1918 - 1977
लेखक
तुम देते हो तकलीफ़ मुझे होती है राहतसच जानिए मैं इस में तकल्लुफ़ नहीं करता
जो ख़ूब देखो तो सारी वही हक़ीक़त हैछुपाना चेहरे का उश्शाक़ से तकल्लुफ़ था
याँ तो तकलीफ़ सी खिंची तकलीफ़वाँ वही अब तलक तकल्लुफ़ है
मिला ज़हर अगर हाथ से यार केउसे नोश-ए-जाँ बे-तकल्लुफ़ किया
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने मेंजो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं
ग़ज़ल एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है "महबूबसे बातें करना"। इस्तिलाः में ग़ज़ल शाइरी की उस सिन्फ़ को कहते हैं जिस में बह्र, क़ाफ़िया,और रदीफ़, की रिआयत की जाए। ग़ज़ल के पहले शेर को 'मतला' और आख़िरी शेर जिस में शायर अपना तख़ल्लुस इस्तिमाल करता है 'मक़्ता' कहते हैं।
मशहूर शाइ’र जो मुशाइ’रों से दूर रहे। अगरा में पैदाइश। पहले सरकारी नौकरी की और फिर कई व्यवसायिक संस्थाओं से जुड़े रहे।आज़ादी के बा’द कराची जा बसे।उ’मर ख़य्याम और मिर्ज़ा‘ ग़ालिब’ की रुबाइयों का उर्दू अनुवाद किया।मर्सिये भी लिखे।
मिर्ज़ा ग़ालिब निस्संदेह उर्दू के ऐसे महान शायर हैं जिन्हें विश्व साहित्य के प्रतिष्ठित कवियों की सूची में गर्व के साथ शामिल किया जा सकता है। ग़ालिब की शायरी की एक विशेषता यह भी है कि उनके कलाम में बड़ी तादाद में ऐसे अशआर मौजूद हैं जिन्हें अलग अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हमने प्रयास किया है कि ग़ालिब के अत्यंत लोकप्रिय अशआर आपके लिए एक साथ पेश किये जाएं। ग़ालिब के समग्र कलाम से केवल २० अशआर का चयन करना कितना कठिन है इसका अन्दाज़ा आपको अवश्य होगा। हम स्वीकार करते हैं कि ग़ालिब के कई बेहतरीन अशआर हमारी सूची में शामिल होने से रह गए हैं। हमें आप ऐसे अशआर बिना किसी संकोच के भेज सकते हैं. हमारा संपादक मंडल आपके द्वारा चिन्हित ऐसे अशआर को टॉप २० सूची में शामिल करने पर विचार कर सकता है। आशा है कि आप इस चयन से लाभान्वित होंगे बेहतर बनाने के लिए हमें अपने क़ीमती सुझावों से अवगत कराते रहेंगे।
Takalluf Bartaraf
मुजतबा हुसैन
लेख
Takalluf Bar Taraf
सौ तकल्लुफ़ और उसकी सीधी बात
अनीस सिद्दीक़ी
इंटरव्यू / साक्षात्कार
Bila Takalluf
सरफ़राज़ शाहिद
हास्य-व्यंग
Nazr-e-Takhallus
अब्दुल क़वी दस्नवी
मज़ामीन / लेख
गद्य/नस्र
Bazm Be Takalluf
सय्यद आबिद हुसैन
भारत का इतिहास
La-Takhaf
हक़्क़ानी अल-क़ासिमी
Deewan-e-Husain
बीबी ख़ुर्शीद जान हुसैन
दीवान
Be Takalluf
सय्यद शमीम हुसैन
Takhallus Bhopali Hayat Aur Khidmat
सफ़ीया वदूद
जीवनी
Bazm Be-Takalluf
Talash
मुमताज़ मुफ़्ती
तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो 'फ़राज़'दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला
मय-कदे में क्या तकल्लुफ़ मय-कशी में क्या हिजाबबज़्म-ए-साक़ी में अदब आदाब मत देखा करो
कभी जब मुद्दतों के बा'द उस का सामना होगासिवाए पास आदाब-ए-तकल्लुफ़ और क्या होगा
बस ये हुआ कि उस ने तकल्लुफ़ से बात कीऔर हम ने रोते रोते दुपट्टे भिगो लिए
प्यार जब हद से बढ़ा सारे तकल्लुफ़ मिट गएआप से फिर तुम हुए फिर तू का उनवाँ हो गए
ऐ 'ज़ौक़' तकल्लुफ़ में है तकलीफ़ सरासरआराम में है वो जो तकल्लुफ़ नहीं करता
तंज़ पैराया-ए-तबस्सुम मेंइस तकल्लुफ़ की क्या ज़रूरत है
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