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ग़ज़ल
कि जिस दिल की ज़मीं बरसों से बंजर हो तो फिर उस पर
नई चाहत उगाने में ज़रा सी देर लगती है
आदिल राही
ग़ज़ल
बीते लम्हे ध्यान में आ कर मुझ से सवाली होते हैं
तू ने किस बंजर मिट्टी में मन का अमृत डोल दिया













