आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "bansii"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "bansii"
नज़्म
हिन्दोस्तान मेरा
हिन्दोस्तान मेरा, हिन्दोस्तान मेरा
गोकुल का इक ग्वाला बंसी बजा रहा है
अर्श मलसियानी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "bansii"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "bansii"
नज़्म
वतन का राग
'कृष्ण' की बंसी ने फूंकी है रूह हमारी जानों में
'गौतम' की आवाज़ बसी है महलों में मैदानों में
हामिदुल्लाह अफ़सर
ग़ज़ल
कान्हा होंगे लोग वहाँ के राधा होंगी बालाएँ
प्यार की बंसी बजती होगी हर एक समय हर ठाओं रे
ग़ौस सीवानी
नज़्म
बसंत और होली की बहार
भेरों की गूँज मस्त है हर किश्त-ज़ार में
बंसी बजाते किश्न है गोया बहार में
उफ़ुक़ लखनवी
नज़्म
पनघट की रानी
रग-रग जिस की है इक बाजा और नस-नस ज़ंजीर
कृष्ण मुरारी की बंसी है या अर्जुन का तीर
साग़र निज़ामी
नज़्म
गाँधी-जी की आवाज़
सुनो कनहैया की बंसी पुकारती है तुम्हें
अब और देर भी करनी न चाहिए यारो
नाज़िश प्रतापगढ़ी
नज़्म
जमुना
बंसी वाले की जुदाई में उड़ा कर सर पे ख़ाक
अपने अश्कों से किया है दामन-ए-साहिल को पाक
सुरूर जहानाबादी
नज़्म
सुब्ह-ए-जुदाई
देखो इन बासी कलियों की पत्ती पत्ती मुरझाई है
वो रात सुहानी बीत चुकी आ पहुँची सुब्ह-ए-जुदाई है
मजीद अमजद
नज़्म
किसी की सदा
रात के पुर-कैफ़ सन्नाटे में बंसी की सदा
चाँदनी के सीम-गूँ शाने पे लहराती हुई
इब्न-ए-सफ़ी
ग़ज़ल
ग़रीबों को फ़क़त उपदेश की घुट्टी पिलाते हो
बड़े आराम से तुम चैन की बंसी बजाते हो




