आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "barsii"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "barsii"
ग़ज़ल
बहुत सँभाला वफ़ा का पैमाँ मगर वो बरसी है अब के बरखा
हर एक इक़रार मिट गया है तमाम पैग़ाम बुझ गए हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
समस्त
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "barsii"
ग़ज़ल
वो आग बरसी है दोपहर में कि सारे मंज़र झुलस गए हैं
यहाँ सवेरे जो ताज़गी थी वो ताज़गी अब कहीं नहीं है
जावेद अख़्तर
ग़ज़ल
इक ख़ामुशी थी तर-ब-तर दीवार-ए-मिज़्गाँ से उधर
पहुँचा हुआ पैग़ाम था बरसी हुई बरसात थी








