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नज़्म
क्रिकेट मैच
देख के अपनी टीम की दुर्गत हाथी चौंका
ख़ुद करने बॉलिंग कवर से आया दौड़ा
हैदर बयाबानी
नज़्म
इतना मालूम है!
ख़ुद से इस बात पे सौ बार वो उलझा होगा
कल वो आएगी तो मैं उस से नहीं बोलूँगा
परवीन शाकिर
ग़ज़ल
गुफ़्तुगू तू ने सिखाई है कि मैं गूँगा था
अब मैं बोलूँगा तो बातों में असर भी देना
मेराज फ़ैज़ाबादी
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नज़्म
जुगनू
जो मुँह बना के किसी दिन न मुझ से रूठ सकी
जो ये भी कह न सकी जा न बोलूँगी तुझ से
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
ज़बाँ-दराज़
आख़िरी तकरार के बाद मैं ने ज़बान समेट ली है
अब मैं एक लफ़्ज़ भी मज़ीद नहीं बोलूँगा
अम्मार इक़बाल
नज़्म
बरसात की बहारें
क्या क्या मची हैं यारो बरसात की बहारें
बोलीं बए बटेरें क़ुमरी पुकारे कू-कू
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
ये कहा सुन के ससुर ने कि कहीं है कोई
सास चुपके से ये बोलीं कि यहीं है कोई
नश्तर अमरोहवी
ग़ज़ल
अच्छा जो ख़फ़ा हम से हो तुम ऐ सनम अच्छा
लो हम भी न बोलेंगे ख़ुदा की क़सम अच्छा


