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नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
नशा चढ़ने लगा है और चढ़ना चाहिए भी था
अबस का निर्ख़ तो इस वक़्त बढ़ना चाहिए भी था
जौन एलिया
नज़्म
मौज़ू-ए-सुख़न
गुल हुई जाती है अफ़्सुर्दा सुलगती हुई शाम
धुल के निकलेगी अभी चश्मा-ए-महताब से रात
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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विषय
चश्मा
चश्मा शायरी
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रेख़्ता शब्दकोश
chashma
चश्मा چشمہ
ऐनक, चश्मा, उपनेत्र ऐनक, आँखों पर लगाया जानेवाला धातु आदि का एक प्रकार का प्रसिद्ध ढाँचा या कमानी जिसमें लगे हुए शीशों की सहायता से वस्तुएँ अधिक स्पष्ट दिखाई पड़ती हैं
chasha
चशा چَشَہ
चटनी, चाटने की खट-मिट्टी चीज़, अवलेह, लऊक़।
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ग़ज़ल
ला उठा तेशा चटानों से कोई चश्मा निकाल
सब यहाँ प्यासे हैं तेरे ख़ुश्क लब देखेगा कौन
मेराज फ़ैज़ाबादी
नज़्म
ज़ौक़ ओ शौक़
क़ल्ब ओ नज़र की ज़िंदगी दश्त में सुब्ह का समाँ
चश्मा-ए-आफ़्ताब से नूर की नद्दियाँ रवाँ!
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
'मीर' मिले थे 'मीरा-जी' से बातों से हम जान गए
फ़ैज़ का चश्मा जारी है हिफ़्ज़ उन का भी दीवान करें
मीराजी
ग़ज़ल
ख़ुश्क है चश्मा-सार-ए-जाँ ज़र्द है सब्ज़ा-ज़ार-ए-दिल
अब तो ये सोचिए कि याँ पहले कभी हवा भी थी
जौन एलिया
नज़्म
मोहब्बत
कमाल-ए-नज़्म-ए-हस्ती की अभी थी इब्तिदा गोया
हुवैदा थी नगीने की तमन्ना चश्म-ए-ख़ातम से
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
होवे इक क़तरा जो ज़हराब-ए-मोहब्बत का नसीब
ख़िज़्र फिर तो चश्मा-ए-आब-ए-बक़ा क्या चीज़ है





