आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "chauras"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "chauras"
ग़ज़ल
मिरे रब चाँद पूनम का ज़रा चौरस ही कर दे तू
गोलाई देखता हूँ मैं तो रोटी याद आती है
मुसव्विर फ़िरोज़पुरी
नज़्म
निसार मैं तेरी गलियों के
जो कोई चाहने वाला तवाफ़ को निकले
नज़र चुरा के चले जिस्म ओ जाँ बचा के चले
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "chauras"
ग़ज़ल
बे-साख़्ता निगाहें जो आपस में मिल गईं
क्या मुँह पर उस ने रख लिए आँखें चुरा के हाथ
निज़ाम रामपुरी
ग़ज़ल
चुरा के ख़्वाब वो आँखों को रेहन रखता है
और उस के सर कोई इल्ज़ाम भी नहीं आता
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
ग़ज़ल
मैं सारा दिन बहुत मसरूफ़ रहता हूँ मगर जूँही
क़दम चौखट पे रखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं
वसी शाह
नज़्म
परछाइयाँ
न जाने कितनी कशाकश से कितनी काविश से
ये सोते जागते लम्हे चुरा के लाए हैं
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
मुझ को ख़राब कर गईं नीम-निगाहियाँ तिरी
मुझ से हयात ओ मौत भी आँखें चुरा के रह गईं







