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नज़्म
काली दीवार
कल वॉशिंगटन शहर की हम ने सैर बहुत की यार
गूँज रही थी सब दुनिया में जिस की जय-जय-कार
अहमद फ़राज़
नज़्म
बरसो राम धड़ाके से
उस के घर को देख के लक्ष्मी मुड़ जाती थी नाके से
बरसो राम धड़ाके से
साहिर लुधियानवी
नज़्म
भारत के सपूतों से ख़िताब
भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ
दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ
लाल चन्द फ़लक
गीत
देखें इन नक़ली चेहरों की कब तक जय-जय-कार चले
उजले कपड़ों की तह में कब तक काला संसार चले
साहिर लुधियानवी
शेर
साँवले तन पे ग़ज़ब धज है बसंती शाल की
जी में है कह बैठिए अब जय कनहय्या लाल की
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
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नज़्म
आओ फिर से दिया जलाएँ
वर्तमान के मोह जाल में आने वाला कल न भुलाएँ
आओ फिर से दिया जलाएँ
अटल बिहारी वाजपेयी
नज़्म
चेहरा तेरा
पुतलियाँ दोनों तिरी आँखों में दो नीलम लगे
और तिरी आँखों का पानी मुझ को जाम-ए-जम लगे










