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नज़्म
रक़ीब से!
तुझ पे बरसा है उसी बाम से महताब का नूर
जिस में बीती हुई रातों की कसक बाक़ी है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
नासिर काज़मी
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kasak
कसक کَسَک
कष्ट, मनस्ताप, यातना, शोक, विपद, हलका मीठा दर्द, खटक, चुभन, हल्की तकलीफ़, हल्का हल्का दर्द, दुखद अनुभव के स्मरण से होने वाली पीड़ा
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ग़ज़ल
ऐतबार साजिद
ग़ज़ल
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
जुगनू
मैं उन की बातों में रह रह के खो भी जाता था
पर इस के साथ ही दिल में कसक सी होती थी
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
चलते चलते कुछ थम जाना फिर बोझल क़दमों से चलना
ये कैसी कसक सी बाक़ी है जब पाँव में वो काँटा भी नहीं
फ़हमीदा रियाज़
नज़्म
आज शब कोई नहीं है
कोई उम्मीद, कोई आस मुसाफ़िर-सूरत
कोई गम, कोई कसक, कोई शक, कोई यक़ीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शेर
चलते चलते कुछ थम जाना फिर बोझल क़दमों से चलना
ये कैसी कसक सी बाक़ी है जब पाँव में वो काँटा भी नहीं
फ़हमीदा रियाज़
नज़्म
क्या इश्क़ एक ज़िंदगी-ए-मुस्तआ'र का
काँटा वो दे कि जिस की खटक ला-ज़वाल हो
या-रब वो दर्द जिस की कसक ला-ज़वाल हो
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
फ़लस्तीनी शोहदा जो परदेस में काम आए
तेरी उल्फ़त तिरी यादों की कसक साथ गई
तेरे नारंज शगूफ़ों की महक साथ गई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
दहकता है कलेजे में कसक का कोएला अब तक
अभी तक दिल के बाम-ओ-दर पे हिज्र ओ ग़म के साए हैं
किश्वर नाहीद
नज़्म
मुझे अपने जीने का हक़ चाहिए
दोस्तो दिल में थोड़ी कसक चाहिए
मुझे अपने जीने का हक़ चाहिए




