आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "kau.dii"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "kau.dii"
नज़्म
मुफ़्लिसी
उस ख़ूब-रू को कौन दे अब दाम और दिरम
जो कौड़ी कौड़ी बोसे को राज़ी हो दम-ब-दम
नज़ीर अकबराबादी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "kau.dii"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
रेख़्ता शब्दकोश
kau.Dii
कौड़ी کَوڑی
उक्त कीड़े का अस्थिकोश जो सबसे कम मूल्य के सिक्के के रूप में चलता था। मुहा०-कौड़ी का हो जाना = (क) मान-मर्यादा जाते रहना। (ख) परम निर्धन या हीन हो जाना। कौड़ी के तीन होना = बहुत ही तुच्छ या हीन होना। कौड़ी के मोल बिकना = बहुत सस्ता बिकना। कौड़ी को न पूछना = फालतू या बेकार समझकर मुफ्त में भी न लेना। कौड़ी-कौड़ी अदा करना, चुकाना या भरना = लिया हुआ ऋण पूरा-पूरा वापस लौटाना। एक कौड़ी भी बाकी न रखना। कौड़ी-कौड़ी जोड़ना = बहुत कष्ट और परिश्रम से धन इकट्ठा करना। कौड़ी फेरा करना या लगाना जल्दी-जल्दी और बार बार आते-जाते रहना। पद-कौड़ी का = जिसका कुछ भी मूल्य न हो। परम तुच्छ। जैसे- यह कपड़ा कौड़ी काम का नहीं है। कौड़ी-कौड़ी को मुहताज परम दरिद्र या निर्धन।
अन्य परिणाम "kau.dii"
नज़्म
तुझे ख़ुद से अलग कैसे करूँ मैं
कलाई में तो चौड़ी का खनकना
ग़रज़ में आईना तो है सँवरना
चन्द्र शेखर वर्मा
नज़्म
सामान दीवाली का
सिरफ़ हराम की कौड़ी का जिन का है बेवपार
उन्हों ने खाया है इस दिन के वास्ते है उधार
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
ख़ुशामद
हक़ तो ये है कि ख़ुशामद से ख़ुदा राज़ी है
कौड़ी पैसे ओ टके ज़र की ख़ुशामद कीजे
नज़ीर अकबराबादी
हास्य
कभी उस ने मिला देखा जो मूली को चुक़ंदर से
तो लाया दूर की कौड़ी ये सरगम के समुंदर से
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
गोरे हाथों में बने चौड़ी ख़त-ए-साग़र का अक्स
तेरे दस्त-ए-नाज़ में नाज़ुक सा पैमाना रहे
रियाज़ ख़ैराबादी
ग़ज़ल
ख़िदमत में तिरी नज़्र को क्या लाएँ ब-जुज़ दिल
हम रिंद तो कौड़ी नहीं रखते हैं कफ़न को


