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ग़ज़ल
बिस कि हैरत से ज़ि-पा उफ़्तादा-ए-ज़िन्हार है
नाख़ुन-ए-अंगुश्त-ए-बुत ख़ाल-ए-लब-ए-बीमार है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
निहायत दिल को है मर्ग़ूब बोसा ख़ाल-ए-मुश्कीं का
दहन तक अपने कब तक देखिए ये दाना आता है
हैदर अली आतिश
नज़्म
आप-बीती
छप गए हैं मिरी नज़रों से ख़द-ओ-ख़ाल-ए-हयात
हर तरफ़ अब्र घनेरा नज़र आता है मुझे
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
तसर्रुफ़ वहशियों में है तसव्वुर-हा-ए-मजनूँ का
सवाद-ए-चश्म-ए-आहू अक्स-ए-ख़ाल-ए-रू-ए-लैला है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
जुज़ दिल सुराग़-ए-दर्द ब-दिल-ख़ुफ़्तगाँ न पूछ
आईना अर्ज़ कर ख़त-ओ-ख़ाल-ए-बयाँ न पूछ
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
क़ुदरत-ए-हक़ है सबाहत से तमाशा है वो रुख़
ख़ाल-ए-मुश्कीं दिल-ए-फ़िरऔं यद-ए-बैज़ा है वो रुख़
हैदर अली आतिश
ग़ज़ल
ख़ाल-ए-आरिज़ देख लो हल्क़े में ज़ुल्फ़-ए-यार के
मार-ए-मोहरा गर न देखा हो दहन में मार के
बहादुर शाह ज़फ़र
नज़्म
तेल के सौदागर
बुख़ारा समरक़ंद इक ख़ाल-ए-हिन्दू के बदले!
बजा है बुख़ारा समरक़ंद बाक़ी कहाँ हैं?
नून मीम राशिद
ग़ज़ल
मद्दाह-ए-ख़ाल-ए-रू-ए-बुताँ हूँ मुझे ख़ुदा
बख़्शे तो क्या अजब कि वो नुक्ता-नवाज़ है
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
ग़ज़ल
पिन्हाँ हुआ है ख़ाल-ए-ख़त-ए-मुश्क-बार में
मिलता नहीं है ढूँढे से नाफ़ा ततार में
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
ग़ज़ल
दिखला न ख़ाल-ए-नाफ़ तू ऐ गुल-बदन मुझे
हर लाला याँ है नाफ़ा-ए-मुश्क-ए-ख़ुतन मुझे












