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नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
बिजलियाँ जिस में हों आसूदा वो ख़िर्मन तुम हो
बेच खाते हैं जो अस्लाफ़ के मदफ़न तुम हो
अल्लामा इक़बाल
शेर
भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम
क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए
ख़ुमार बाराबंकवी
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रेख़्ता शब्दकोश
KHudaa.ii
ख़ुदाई خُدائی
ईश्वर-कृपा, ईश्वर-महिमा, दया-दृष्टि, विभूति, ईश्वरत्व, संसार, जगत्, दुनिया, सृष्टि, दुनिया, राज, हुक्मरानी
KHurmaa.ii
ख़ुर्माई خُرْمائی
कबूतर का एक रंग
KHudaa.ii ho
ख़ुदाई हो خُدائی ہو
ईश्वर ही करे
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नज़्म
निसार मैं तेरी गलियों के
गर आज औज पे है ताला-ए-रक़ीब तो क्या
ये चार दिन की ख़ुदाई तो कोई बात नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
कलीद-ए-किश्त-ज़ार-ए-ख़्वाब भी गुम हो गई आख़िर
कहाँ अब जादा-ए-ख़ुर्रम में सर-सब्ज़ाना जाना है
जौन एलिया
ग़ज़ल
नींद का हल्का गुलाबी सा ख़ुमार आँखों में था
यूँ लगा जैसे वो शब को देर तक सोया नहीं
मुनीर नियाज़ी
ग़ज़ल
वो करेंगे ना-ख़ुदाई तो लगेगी पार कश्ती
है 'नसीर' वर्ना मुश्किल, तिरा पार यूँ उतरना










