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ख़ुमार बाराबंकवी

1919 - 1999 | बाराबंकी, भारत

लोकप्रिय शायर, फिल्मी गीत भी लिखे।

लोकप्रिय शायर, फिल्मी गीत भी लिखे।

ग़ज़ल 27

शेर 41

दुश्मनों से प्यार होता जाएगा

दोस्तों को आज़माते जाइए

भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम

क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए

वही फिर मुझे याद आने लगे हैं

जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं

ई-पुस्तक 6

आतिश-ए-तर

 

1964

Atish-e-Tar

 

1964

Hadees-e-Digaran

 

 

Hadees-e-Digaran

 

 

मुशायरा जश्न-ए-जम्हूरियत

 

1977

Raqs-e-Mai

 

1981

 

चित्र शायरी 11

झुँझलाए हैं लजाए हैं फिर मुस्कुराए हैं किस एहतिमाम से उन्हें हम याद आए हैं दैर-ओ-हरम के हब्स-कदों के सताए हैं हम आज मय-कदे की हवा खाने आए हैं अब जा के आह करने के आदाब आए हैं दुनिया समझ रही है कि हम मुस्कुराए हैं गुज़रे हैं मय-कदे से जो तौबा के बा'द हम कुछ दूर आदतन भी क़दम लड़खड़ाए हैं ऐ जोश-ए-गिर्या देख न करना ख़जिल मुझे आँखें मिरी ज़रूर हैं आँसू पराए हैं ऐ मौत ऐ बहिश्त-ए-सुकूँ आ ख़ुश-आमदीद हम ज़िंदगी में पहले पहल मुस्कुराए हैं जितनी भी मय-कदे में है साक़ी पिला दे आज हम तिश्ना-काम ज़ोहद के सहरा से आए हैं इंसान जीते-जी करें तौबा ख़ताओं से मजबूरियों ने कितने फ़रिश्ते बनाए हैं समझाते क़ब्ल-ए-इश्क़ तो मुमकिन था बनती बात नासेह ग़रीब अब हमें समझाने आए हैं का'बे में ख़ैरियत तो है सब हज़रत-ए-'ख़ुमार' ये दैर है जनाब यहाँ कैसे आए हैं

मोहब्बत को समझना है तो नासेह ख़ुद मोहब्बत कर किनारे से कभी अंदाज़ा-ए-तूफ़ाँ नहीं होता

सहरा को बहुत नाज़ है वीरानी पे अपनी वाक़िफ़ नहीं शायद मिरे उजड़े हुए घर से

ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक न लो इंतिक़ाम मुझ से मिरे साथ साथ चल के

वीडियो 28

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Aankhon ke charagon mein ujaale na rahenge

ख़ुमार बाराबंकवी

Aye maut unko bhulaye zamane guzar gaye

ख़ुमार बाराबंकवी

Chala Hoon Main Kooche Se

ख़ुमार बाराबंकवी

Kabhi sher-o-naghma ban ke

ख़ुमार बाराबंकवी

अकेले हैं वो और झुँझला रहे हैं

ख़ुमार बाराबंकवी

इक पल में इक सदी का मज़ा हम से पूछिए

ख़ुमार बाराबंकवी

इक पल में इक सदी का मज़ा हम से पूछिए

ख़ुमार बाराबंकवी

ऐ मौत उन्हें भुलाए ज़माने गुज़र गए

ख़ुमार बाराबंकवी

कभी शेर-ओ-नग़्मा बन के कभी आँसुओं में ढल के

ख़ुमार बाराबंकवी

क्या हुआ हुस्न है हम-सफ़र या नहीं

ख़ुमार बाराबंकवी

ग़म दुनिया बहुत ईज़ा-रसाँ है

ख़ुमार बाराबंकवी

झुँझलाए हैं लजाए हैं फिर मुस्कुराए हैं

ख़ुमार बाराबंकवी

दिल को तस्कीन-ए-यार ले डूबी

ख़ुमार बाराबंकवी

न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है

ख़ुमार बाराबंकवी

बात जब दोस्तों की आती है

ख़ुमार बाराबंकवी

मुझ को शिकस्त-ए-दिल का मज़ा याद आ गया

ख़ुमार बाराबंकवी

ये मिस्रा नहीं है वज़ीफ़ा मिरा है

ख़ुमार बाराबंकवी

वही फिर मुझे याद आने लगे हैं

ख़ुमार बाराबंकवी

वो हमें जिस क़दर आज़माते रहे

ख़ुमार बाराबंकवी

वो हमें जिस क़दर आज़माते रहे

ख़ुमार बाराबंकवी

हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए

ख़ुमार बाराबंकवी

ऑडियो 9

ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही

झुँझलाए हैं लजाए हैं फिर मुस्कुराए हैं

तू चाहिए न तेरी वफ़ा चाहिए मुझे

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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