aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "maafaat"
लाला माधव राम जौहर
1810 - 1889
शायर
ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी
1929 - 2017
माहम शाह
born.1997
माहम ख़ान
born.1995
माधव अवाना
born.1974
माधव कौशिक
born.1954
माधव झा
माधो नूर
उर्मिलामाधव
माहम हया सफ़दर
born.1999
मूसा इबराहीम मायत
लेखक
बाबू माधवदास
मत्बा मफाद-ए-हिंद, बनारस
पर्काशक
माधव राव गाएकवाड़
साहिल माधोपुरी
इस इश्क़ की तलाफ़ी-ए-माफ़ात देखनारोने की हसरतें हैं जब आँसू नहीं रहे
दे दाद ऐ फ़लक दिल-ए-हसरत-परस्त कीहाँ कुछ न कुछ तलाफ़ी-ए-माफ़ात चाहिए
निकले जो मय-कदे से तो मस्जिद था हर मक़ामहर गाम पर तलाफ़ी-ए-माफ़ात हो गई
पिछले ग़मों का ज़िक्र ही क्या जब वो मिल गएऐ आसमाँ तलाफ़ी-ए-माफ़ात हो गई
यहाँ कोई नहीं सुनता हदीस-ए-दिल-ज़दगाँमगर मैं और तरह बात करता रहता हूँ
हर मौक़े पर याद आने वाले कई शेर देने वाले विख्यात शायर , मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन।
मफ़रمَفَر
बचाव, पलायन
माफ़ातمافات
जो जाता रहा हो, जो गुज़र चुका हो, वह जिस के करने का वक़्त गुज़र गया
मफ़ादمَفاد
लाभ, फ़ाइदा, नफ़ा, भलाई, बेहतरी
वफ़ातوَفات
मौत, मृत्यु, देहांत, मरण, इंतिक़ाल
Barmahal Ashar Aur Unke Makhaz
ख़लीक़ुज़्ज़माँ नुसरत
संकलन
Ilm-ul-Maeeshat
मुहम्मद इक़बाल
अर्थशास्त्र
नूर-ए-मारफ़त
सय्यद मोहम्मद सईद
काव्य संग्रह
इक़बाल के शेरी माख़ज़
सय्यद वज़ीरुल हसन अाबदी
शोध
Barmahal Ashaar Aur Unke Maakhaz
अहद-ए-बनू उमय्या में इल्म-उल-अनसाब
माहिर मजहद जीजान अद्दलिमी
Barr-e-Sagheer Mein Mausiqi Ke Farsi Makhaz
रशीद मलिक
संगीत
कारवान-ए-मईशत
लियो हुबरमेन
Ba Farz-e-Muhal
हास्य-व्यंग
हर्फ़-ए-मुकर्रर
Tareekh-e-Tabri Ke Maakhaz Ka Tanqeedi-o-Tahqeeqi Mutala
डॉ. जव्वाद अली
इतिहास
फ़िक्र-ए-इक़बाल के नस्री माख़ज़
डॉ. शमीम अहमद
Kalam-e-Shad Al-Maruf Ba-Ism-e-Tareekhi Makhzan-e-Asrar-e-Marfat
शाद मेरठी
Madhay Pradesh Mein Urdu Adab Ke Pachees Saal
तहक़ीक़-ए-इक़बालियात के माख़ज़
रफ़ीउद्दीन हाश्मी
नसीहतें न करें अब तो क्या करें कि 'रईस'यूँही तलाफ़ी-ए-माफ़ात करते रहते हैं
ख़ूँ-रंग हुए शाम-ओ-सहर बे-ख़बर रहेमुआ'फ़ी नहीं तलाफ़ी-ए-माफ़ात चाहिए
की उस ने गो तलाफ़ी-ए-माफ़ात बारहालेकिन जो उस पे मान था वो मान तो गया
हर तरह से ज़ाएअ' है यहाँ हर औक़ातमाफ़ात तलाफ़ी है तलाफ़-ए-माफ़ात
अब ख़्वाहिश-ए-तलाफ़ी-ए-माफ़ात भी गईजी में जो थी इक बात सो वो बात भी गई
उम्र-ए-गुज़िश्ता चाहिए ताअ'त के वास्तेहम क्यों करें तलाफ़ी-ए-माफ़ात का ख़याल
मुमकिन है फिर तलाफ़ी-ए-माफ़ात हो न होआ जा कि इस के बा'द कोई बात हो न हो
मुद्दत के बा'द उन से मुलाक़ात हो गईअच्छा हुआ तलाफ़ी-ए-माफ़ात हो गई
अपने नगर में बस यही किर्चें हैं हर तरफ़कुछ गौहर-ए-तलाफ़ी-ए-माफ़ात ले चलें
अल्लह-रे इल्तिफ़ात-ओ-नदामत की साज़िशेंनज़रें मिलीं तलाफ़ी-ए-माफ़ात हो गई
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