Ghaus Khah makhah Hyderabadi's Photo'

ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी

1929 - 2017 | हैदराबाद, भारत

ग़ज़ल 3

 

शेर 1

छेड़ती हैं कभी लब को कभी रुख़्सारों को

तुम ने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पे चढ़ा रक्खा है

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पुस्तकें 3

Ba Farz-e-Muhal

 

1992

हर्फ़-ए-मुकर्रर

 

1998

काग़ज़ के तीशे

 

2009

 

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