आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "markaz"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "markaz"
शेर
जब आ जाती है दुनिया घूम फिर कर अपने मरकज़ पर
तो वापस लौट कर गुज़रे ज़माने क्यूँ नहीं आते
इबरत मछलीशहरी
शेर
अपने मरकज़ की तरफ़ माइल-ए-परवाज़ था हुस्न
भूलता ही नहीं आलम तिरी अंगड़ाई का
मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "markaz"
ग़ज़ल
शकील बदायूनी
नज़्म
जवाहर-लाल नेहरू
दामन-ए-वक़्त पे अब ख़ून के छींटे न पड़ें
एक मरकज़ की तरफ़ दैर-ओ-हरम ले के चलो
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
मर्कज़-ए-दीदा-ए-ख़ुबान-ए-जहाँ हैं भी तो क्या
एक निस्बत भी तो रखते हैं तिरी ज़ात से हम
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
दिल हसीं है तो मोहब्बत भी हसीं पैदा कर
आसमाँ मरकज़-ए-तख़्ईल-ओ-तसव्वुर कब तक
आसमाँ जिस से ख़जिल हो वो ज़मीं पैदा कर
जिगर मुरादाबादी
नज़्म
तस्वीर ओ तसव्वुर
तमाम रानाइयों के मज़हर, तमाम रंगीनियों के मंज़र
सँभल सँभल कर सिमट सिमट कर सब एक मरकज़ पर आ रहे हैं
जिगर मुरादाबादी
नज़्म
यादें
शहर-ए-तमन्ना के मरकज़ में लगा हुआ है मेला सा
खेल-खिलौनों का हर-सू है इक रंगीं गुलज़ार खिला







