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ग़ज़ल
हस्ती को मिस्ल-ए-नक़्श-ए-कफ़-ए-पा मिटा चुके
आशिक़ नक़ाब-ए-शाहिद-ए-मक़्सूद उठा चुके
हैदर अली आतिश
ग़ज़ल
जो दिखा दे जल्वा रू-ए-शाहिद-ए-मक़्सूद का
सदक़े साक़ी इस शराब-ए-आइना-किरदार के
अब्दुल मन्नान बेदिल अज़ीमाबादी
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हास्य
ख़ुशा ऐ वादी-ए-सर्फ़िंग ब-चश्म-ए-'शाहिद'-ए-हैराँ
हमारे बाई-फोकल में ग़ज़ब के ज़ेर-ओ-बम निकले
शाहिद जमील
ग़ज़ल
इक नहीं मैं ही शहीद-ए-तल्ख़ी-ए-गुफ़्तार-ए-दोस्त
सारा 'आलम है क़तील-ए-दशना-ए-किरदार-ए-दोस्त
शहरयार परवाज़
ग़ज़ल
जमाल-ए-शाहिद-ए-फ़ितरत का पर्दा-दार हूँ मैं
गुलों की क्या हो तमन्ना कि ख़ुद बहार हूँ मैं
शिवराज बहार
ग़ज़ल
शाहिद-ए-मक़्सूद तक पहुँचेंगे क्यूँकर देखिए
बंद है बाब-ए-तमन्ना है ग़ज़ब खुलता नहीं
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
ए 'शाहिद'-ए-ख़ुश-बख़्त 'यगाना' से ये कह दो
कहते हैं कि 'ग़ालिब' के तरफ़-दार थे हम लोग
शाहिद कमाल
नज़्म
अहल-ए-जुनूँ
हम वही अहल-ए-जुनूँ अहल-ए-वफ़ा साहिब-दिल
हम कि हर दौर में औराक़-ए-ज़माना के अमीं
नूर-ए-शमा नूर
ग़ज़ल
मेरे तेवर ही ऐ 'मक़्सूद' बचत है मेरी
सख़्त मुश्किल में भी नीलाम ये ज़ेवर न हुआ





