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ग़ज़ल
पुरनम इलाहाबादी
सलाम
'अली-ए-मुर्तज़ा का ला'ल है ज़हरा का प्यारा है
मोहम्मद का नवासा चर्ख़-ए-ईमाँ का सितारा है
सय्यदा फ़रहत
बच्चों की कहानी
नसीर अहमद नासिर
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नज़्म
एक एक्सप्रेस ट्रेन
कई कुछ होश में हैं और कुछ बेहोश बैठे हैं
कई ना'रा-ब-लब हैं और कफ़न-बर-दोश बैठे हैं
असद जाफ़री
ग़ज़ल
शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं
मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे
जौन एलिया
नज़्म
शिकवा
नाले बुलबुल के सुनूँ और हमा-तन गोश रहूँ
हम-नवा मैं भी कोई गुल हूँ कि ख़ामोश रहूँ
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
व-यबक़ा-वज्ह-ओ-रब्बिक (हम देखेंगे)
उट्ठेगा अनल-हक़ का नारा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
शकील बदायूनी
नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
चश्म-ए-अक़्वाम ये नज़्ज़ारा अबद तक देखे
रिफ़अत-ए-शान-ए-रफ़ाना-लका-ज़िक्र देखे
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
जब वो जमाल-ए-दिल-फ़रोज़ सूरत-ए-मेहर-ए-नीमरोज़
आप ही हो नज़ारा-सोज़ पर्दे में मुँह छुपाए क्यूँ
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
रख़नों से दीवार-ए-चमन के मुँह को ले है छुपा या'नी
इन सूराख़ों के टुक रहने को सौ का नज़ारा जाने है












