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नज़्म
सुब्ह-ए-आज़ादी (अगस्त-47)
कहाँ से आई निगार-ए-सबा किधर को गई
अभी चराग़-ए-सर-ए-रह को कुछ ख़बर ही नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
किसे ज़िंदगी है अज़ीज़ अब किसे आरज़ू-ए-शब-ए-तरब
मगर ऐ निगार-ए-वफ़ा तलब तिरा ए'तिबार कोई तो हो
अहमद फ़राज़
ग़ज़ल
याद थीं हम को भी रंगा-रंग बज़्म-आराईयाँ
लेकिन अब नक़्श-ओ-निगार-ए-ताक़-ए-निस्याँ हो गईं
मिर्ज़ा ग़ालिब
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रेख़्ता शब्दकोश
nigaah
निगाह نِگاہ
दृष्टि, प्रेक्षा, नजर, चितवन,चशम, आँख, नेत्र ज्योति, आँखों की रोशनी, बसारत, बीनाई, देखना, नज़ारा, उम्मीद, भरोसा, ख़्याल, कृपादृष्टि, मेहरबानी, तवज्जोह, इनायत, निगरानी, ख़बरदारी, रखवाली, चौकसी, ऩजरबंदी, पहचान; परख, अवलोकन, विचार, समझ
jigar
जिगर جِگَر
वह जमा हुआ ख़ून जो हर प्राणी के हृदय में होता है और ख़ून का कोषागार कहलाता है, आ'ज़ा-ए-रईसा में से एक अंग का नाम, कलेजा (कलेजी)
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नज़्म
परछाइयाँ
नागाह लहकते खेतों से टापों की सदाएँ आने लगीं
बारूद की बोझल बू ले कर पच्छिम से हवाएँ आने लगीं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
दुआ
आइए अर्ज़ गुज़ारें कि निगार-ए-हस्ती
ज़हर-ए-इमरोज़ में शीरीनी-ए-फ़र्दा भर दे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
इबलीस की मजलिस-ए-शूरा
हम ने ख़ुद शाही को पहनाया है जमहूरी लिबास
जब ज़रा आदम हुआ है ख़ुद-शनास-ओ-ख़ुद-निगर
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
बहादुर शाह ज़फ़र
नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
मुल्क हाथों से गया मिल्लत की आँखें खुल गईं
हक़ तिरा चश्मे 'अता कर दस्त-ए-ग़ाफ़िल दर निगर











