आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "nit"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "nit"
ग़ज़ल
उस के कूचे में है नित सूरत-ए-बेदाद नई
क़त्ल हर ख़स्ता बा-अंदाज़-ए-दिगर होता है
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
नज़्म
मुझे सोचने दे
हर तरफ़ आतिश ओ आहन का ये सैलाब-ए-आज़ीम
नित-नए तर्ज़ पे होती हुई दुनिया तक़्सीम
साहिर लुधियानवी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "nit"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "nit"
ग़ज़ल
हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग
देखते ही देखते कितने बदल जाते हैं लोग
हिमायत अली शाएर
शेर
सभी इनआम नित पाते हैं ऐ शीरीं-दहन तुझ से
कभू तू एक बोसे से हमारा मुँह भी मीठा कर
जुरअत क़लंदर बख़्श
ग़ज़ल
नित नित का ये आना जाना मेरे बस की बात नहीं
दरबानों के नाज़ उठाना मेरे बस की बात नहीं
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
ग़ज़ल
तबस्सुम जब किसी का रूह में तहलील होता है
तो दिल की बाँसुरी से नित नए नग़्मे निकलते हैं
जमील मज़हरी
ग़ज़ल
हम से रूठ के जाने वालो इतना भेद बता जाओ
क्यूँ नित रातो को सपनों में आते हो मन जाते हो
हबीब जालिब
शेर
हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग
देखते ही देखते कितने बदल जाते हैं लोग





