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नज़्म
आदमी-नामा
चलता है आदमी ही मुसाफ़िर हो ले के माल
और आदमी ही मारे है फाँसी गले में डाल
नज़ीर अकबराबादी
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नज़्म
भारत के सपूतों से ख़िताब
फाँसी का जेल का डर दिल से 'फ़लक' मिटा कर
ग़ैरों के मुँह पे सच्ची बातें सुनाते जाओ
लाल चन्द फ़लक
ग़ज़ल
बहादुर शाह ज़फ़र
नज़्म
हुसूल-ए-आज़ादी की दिक़्क़तें
दाना-पानी कर दिया जाएगा बिल्कुल तुम पे बंद
तुम को भूखों मार के क़ब्ज़े में लाया जाएगा
अहमक़ फफूँदवी
शेर
हमें दी जाएगी फाँसी हमारे अपने जिस्मों में
उजाड़ी हैं तमन्नाओं की लाखों बस्तियाँ हम ने
अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
ग़ज़ल
हमें दी जाएगी फाँसी हमारे अपने जिस्मों में
उजाड़ी हैं तमन्नाओं की लाखों बस्तियाँ हम ने
अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
नज़्म
काले सफ़ेद परों वाला परिंदा और मेरी एक शाम
ख़ूनी दरवाज़े पर शहज़ादों की फाँसी का एलान हुआ था
ये दुनिया लम्हा लम्हा जीती है
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
चढ़ा दिया है भगत-सिंह को रात फाँसी पर
गिरी है बर्क़-ए-तपाँ दिल पे ये ख़बर सुन कर
चढ़ा दिया है भगत-सिंह को रात फाँसी पर
आफ़ताब रईस पानीपती
हास्य
दर्द-ए-सर है कि फ़्लू है कि तप-ए-खाँसी है
उम्र-भर क़ैदी का अंजाम यहाँ फाँसी है













