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ग़ज़ल
कभी उन का नाम लेना कभी उन की बात करना
मिरा ज़ौक़ उन की चाहत मिरा शौक़ उन पे मरना
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
मिरी ज़ीस्त पर मसर्रत कभी थी न है न होगी
कोई बेहतरी की सूरत कभी थी न है न होगी
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
दीन से दूर, न मज़हब से अलग बैठा हूँ
तेरी दहलीज़ पे हूँ, सब से अलग बैठा हूँ
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
बिसात-ए-बज़्म उलट कर कहाँ गया साक़ी
फ़ज़ा ख़मोश सुबू चुप उदास पैमाने
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
अजीब मंज़र-ए-बाला-ए-बाम होता है
जब आश्कार वो माह-ए-तमाम होता है
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
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नअत
अब तंगी-ए-दामाँ पे न जा और भी कुछ माँग
हैं आज वो माइल-ब-अता और भी कुछ माँग
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
शेर
किसी की ज़ुल्फ़ के सौदे में रात की है बसर
किसी के रुख़ के तसव्वुर में दिन तमाम किया
पीर शेर मोहम्मद आजिज़
शेर
ग़ैर से दूर मगर उस की निगाहों के क़रीं
महफ़िल-ए-यार में इस ढब से अलग बैठा हूँ
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
तंज़-ओ-मज़ाह
पतरस बुख़ारी
नअत
इक मैं ही नहीं उन पर क़ुर्बान ज़माना है
जो रब्ब-ए-दो-आलम का महबूब-ए-यगाना है
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
नअत
कौनैन में यूँ जल्वा-नुमा कोई नहीं है
अल्लाह के बा'द उन से बड़ा कोई नहीं है
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
नअत
थी जिस के मुक़द्दर में गदाई तिरे दर की
क़ुदरत ने उसे राह दिखाई तिरे दर की
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
उन के अंदाज़-ए-करम उन पे वो आना दिल का
हाए वो वक़्त वो बातें वो ज़माना दिल का
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
शेर
न तो मैं हूर का मफ़्तूँ न परी का आशिक़
ख़ाक के पुतले का है ख़ाक का पुतला आशिक़
पीर शेर मोहम्मद आजिज़
उद्धरण
जब दुनिया प्रेमी और पीतम को मिलने नहीं देती तो दिल का साज़ तड़प उठता है और क़ुदरत गीत बनाती है।...
मीराजी
नअत
जिस दिन से पा-ए-निस्बत रक्खा तिरी गली में
देखा फिर अहल-ए-दिल ने क्या क्या तिरी गली में
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
नअत
हश्र में मुझ को बस इतना आसरा दरकार है
इल्तिफ़ात-ए-शाफ़े'-ए-रोज़-ए-जज़ा दरकार है
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
नअत
हैं वक़्फ़ जान-ओ-दिल मिरे इस काम के लिए
पढ़िए दरूद रहबर-ए-इस्लाम के लिए
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
नअत
बख़्त मेरा जो मोहब्बत में रसा हो जाए
मेरी तक़दीर मदीने की फ़ज़ा हो जाए






