aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "ravaadaar"
रविंदर अज्नबी
शायर
रविन्द्र कुमार जैन
लेखक
मोहम्म्द रज़दार ख़ान
सय्यद मोहम्मद अली जमाल रादह
मिर्ज़ा वाहिद बेग रसलदार चुग़ताई नौशा
राजदार
रंजीत रजवाड़ा
born.1992
कलाकार
आँख उठा कर जो रवादार न था देखने कावही दिल करता है अब मिन्नत ओ ज़ारी उस की
इश्क़ हमदर्दी-ए-आलम का रवादार नहींहो गई भूल 'फ़िराक़' आप के ग़म-ख़्वारों से
हम मुसलमान हैं दहशत के रवादार नहींकिसी ख़ित्ते के भी इंसान से बेज़ार नहीं
सब को मिल जाए गुनाहों का यहीं ख़म्याज़ाना-रवा-दार फ़ज़ाओं की झुलसती हुई लू!
हम इस से मता'-ए-दिल-ओ-जाँ माँग रहे हैंजो एक तबस्सुम का रवादार नहीं है
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रवाटा رَواٹا
कूदों या सावाँ की बनी हुई रोटी
रवाना رَوانا
रवादार رَوادار
उचित प्रकार का व्यव हार करने तथा संबंध या लगाव रखनेवाला। उदारचेता।
वफ़ादार وَفادار
(शाब्दिक) जो स्वामी या मित्र का तन, मन, धन से भक्त हो, वफ़ा अर्थात निष्ठा रखने वाला, स्वामिभक्त
Urdu Adab Mein Nisai Tanqeed
उज़्मा फ़रमान फ़ारूक़ी
आलोचना
Rawayat-e-Falsafa
अली अब्बास जलालपुरी
दर्शन / फ़िलॉसफ़ी
Faiz Ahmad Faiz
नुसरत चौधरी
सफ़र नामा-ए- हरमैन
मुंशी नवल किशोर के प्रकाशन
Hindustan Ke Ahd-e-Mazi Mein Musalman Hukmaranon Ki Mazhabi Rawadari
सय्यद सबाहुद्दीन अब्दुर्रहमान
Raadaar
साक़ी फ़ारुक़ी
काव्य संग्रह
तावील-उल-मनान
मौलाना मोहम्मद इब्न-ए-सीरिन
Nai Sheri Rawayat
शमीम हनफ़ी
शायरी तन्क़ीद
Rawayat-ul-Tayyab
क़ारी मुहम्मद तय्यब
दीवान-ए-नोशा
दीवान
Salateen-e-Aasif Jahi Ki Mazhabi Rawadari
मोहम्मद अब्दुल वहाब अंदलीब
Hindustan Ke Ahd-e-Mazi Musalman Hukmranaon Ki Mazhabi Rawadari
सांस्कृतिक इतिहास
Islam Mein Mazhabi Rawadari
इस्लामियात
Silsilat-ul-Rawayat-il-Usmaniya
बू लैस दमिशक अल-सिर्री
मैं जिस को देखने की रवा-दार तक न थीसर उस के सामने भी झुकाना पड़ा मुझे
इस तकल्लुफ़ का रवादार न हो
इंसानियत के दर्द का है तर्जुमाँ बशीरये बे-मुरव्वती का रवादार नहीं है
इक फल के रवादार न थे ख़ुल्द-ए-बरीं मेंदिल तेरी बहिश्तों की तलब छोड़ गया है
सहरा के गर्द-ओ-गर्म ही अब रास आ गए'सीमा' किसी चमन के रवादार हम नहीं
अब शिकायत न करो आप ने जो दर्द दिएहम को पीने का रवादार बना देते हैं
बन रवादार ये अपनों की शिकायत कैसीनाम इसी का तो मुरव्वत है कि नुक़सान उठा
बे-लौस-ओ-रवादार तुम्हारी ही तरह होदुश्मन भी मिरे यार तुम्हारी ही तरह हो
मोह लेता है वो गुफ़्तार से दुनिया भर कोबात करने का रवादार नहीं है घर में
मैं परेशाँ हूँ भिकारी तो नहीं हूँ लोगोक्यों कोई आँख मिलाने का रवादार नहीं
मैं ख़ुद से निभाने का रवादार नहीं थाये पहली मोहब्बत मिरे हम-ज़ाद की ज़िद है
उस पे होते हैं ज़माने के करम ऐ 'अफ़ज़ल'इक ज़रा से जो करम का भी रवादार न हो
इश्क़ करते ही हुए अपने पराए दुश्मनबात करने का कोई मुझ से रवादार न था
तुम तशद्दुद के रवादार नहीं हो लेकिनअम्न की दिल से हिमायत भी कहाँ की तुम ने
इस दौर में करम का रवादार कौन हैपचताए क्यूँ कोई सितम-ए-ना-रवा के बा'द
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