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नज़्म
ताज-महल
मेरी महबूब उन्हें भी तो मोहब्बत होगी
जिन की सन्नाई ने बख़्शी है उसे शक्ल-ए-जमील
साहिर लुधियानवी
नज़्म
तुलू-ए-इस्लाम
नज़र को ख़ीरा करती है चमक तहज़ीब-ए-हाज़िर की
ये सन्नाई मगर झूटे निगूँ की रेज़ा-कारी है
अल्लामा इक़बाल
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नज़्म
क़ुतुब-मीनार
तेरी सन्नाई ज़माने के लिए पुर-पेच है
आज भी पैरिस का टावर तेरे आगे हेच है
रहबर जौनपूरी
ग़ज़ल
ग़ज़ल-गोई के फ़न का यूँ कभी इज़हार होता है
मोहब्बत दिल से होती है नज़र से प्यार होता है
अमानुल्लाह शाद सनाई
ग़ज़ल
बहुत देखा है तुम ने हुस्न-ए-सन्नाई मगर उस को
जो देखो तो कहोगे वाह-वा बरजस्तगी है ये
मोहम्मद आज़म
ग़ज़ल
मेरे हक़ में तो हर-इक मौसम ख़िज़ाँ-आसार था
किस की सन्नाई ने गुल-मंज़र सजाया हर-तरफ़











