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महेंद्र कुमार सानी

1984 | पंचकुला, भारत

नई नस्ल के सबसे प्रमुख शायरों में शामिल/उभरते हुए आलोचक

नई नस्ल के सबसे प्रमुख शायरों में शामिल/उभरते हुए आलोचक

ग़ज़ल 9

शेर 12

मैं चाहता हूँ कि तेरी तरफ़ देखूँ मैं

मिरी नज़र को मगर तू ने बाँध रक्खा है

मैं तन्हाई को अपना हम-सफ़र क्या मान बैठा

मुझे लगता है मेरे साथ दुनिया चल रही है

यक़ीनन सोचता होगा वो मुझ को

उसे मैं ने अभी सोचा नहीं है

पुस्तकें 1

Khak-e-Khameer

 

2017

 

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