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ग़ज़ल
कई बरसों से इस पर ही बहस जारी है संसद में
जो भेजा एक रूपे था तो पहुँचा एक आना क्यों
डॉ राकेश जोशी
हिंदी ग़ज़ल
सियासत जब कभी अंगड़ाइयाँ लेती है संसद में
क़यामत नांचने लगती है सड़कों पर जहाँ मैं हूँ
बुधिसेना शर्मा
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रेख़्ता शब्दकोश
ha.nsaa.ii
हँसाई ہَنسائی
हंसने की क्रिया या भाव, उपहास पूर्ण निन्दा, जैसे यह तो जगत में हँसाई का काम है
saa.nsaa
साँसा سانسا
जीवन। जिंदगी। जैसे-जब तक साँसा, तब तक आशा। पुं० [सं० संशय] १. संदेह। शक। उदा०-सतगुर मिलिया साँसा भाग्या, सैन बताई साँची।-मीराँ। २. भय। डर। पुं० साँसत। जैसे-मेरी जान तभी से साँसे में पड़ी है। वि० साँचा (सच्चा)।
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नज़्म
कब तक आँखें मूँद के बैठें
कब तक संसद में बैठेंगे जिन को जेल में जाना था
वो जो पेशे से मुजरिम हैं क्या क़ानून बनाएँगे
सदा अम्बालवी
ग़ज़ल
अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ
मिरा लफ़्ज़ लफ़्ज़ हो आईना तुझे आइने में उतार लूँ
बशीर बद्र
ग़ज़ल
साअद-ए-सीमीं दोनों उस के हाथ में ला कर छोड़ दिए
भूले उस के क़ौल-ओ-क़सम पर हाए ख़याल-ए-ख़ाम किया
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
इशक़-ए-पेचाँ की संदल पर जाने किस दिन बेल चढ़े
क्यारी में पानी ठहरा है दीवारों पर काई है














